होम लोन पर 2 लाख की आयकर छूट सीमा बढ़ने की उम्मीद, घर खरीदारों को मिल सकते हैं कई और तोहफे

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छोटे घरों पर मकान का 90 फीसदी कर्ज मिले

उद्योग संगठनों की ओर से मांग की गई है कि 30 लाख रुपये या उससे कम के किफायती घरों पर उसकी कीमत का 90 प्रतिशत तक होम लोन (Home Loan) दिया जाए. एमआईजी और एचआईजी को भी इस दायरे में लाया जाए तो बेहतर है. होम लोन के ब्याज पर आयकर छूट की सालाना 2 लाख की सीमा को पूरी तरह खत्म किया जाए या फिर इसे नए स्तर पर ले जाया जाए. 

कैपिटल गेन टैक्स 10 प्रतिशत हो

उद्योग संगठनों और बिल्डरों की मांग है कि दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (लांग टर्म कैपिटल गेन्स यानी LTCG)को 10 प्रतिशत पर लाया जाए. लांग टर्म कैपिटल एसेट का लाभ प्राप्त करने के लिए किसी भी आवासीय संपत्ति का धारक बने रहने की समय अवधि को मौजूदा 24/36 महीने से कम करके 12 महीने तक किया जाना आवश्यक है.

किराये के मकानों के लिए एचआरए बढ़ाए सरकार

किराये के घरों को प्रोत्साहित करने के लिए कर छूट में HRA का दायरा बढ़ाने की जरूरत है. कामर्शियल भवनों की तरह किराये की परियोजनाओं के लिए बढ़ी हुई डिप्रिशिएसन रेट और किराये की आय से होने वाले नुकसान को “कैरी ऑन” की अनुमति दी जानी चाहिए. किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग) के पूरा होने की अवधि को छह साल तक बढ़ाने से भी रियल एस्टेट सेक्टर को फायदा पहुंचेगा. 

घरों पर सब्सिडी स्कीम का दायरा बढ़े

सस्ती आवासीय परियोजनाओं (Affordable Housing) के लिए रियायती दरों पर कर्ज मुहैया कराना भी बेहतर होगा. क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) का लाभ सभी वर्गों को दिए जाने से बड़ी संख्या में लोग घर खरीदने के लिए आगे आएंगे.

रेंटल हाउसिंग को बढ़ावा दे सरकार

रेंटल हाउसिंग (Rental Housing) को बढ़ावा देने के लिए वार्षिक किराये की आय (रखरखाव के उद्देश्य से) से 30 प्रतिशत की कटौती को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाना चाहिए. यह न केवल ROI में सुधार करेगा, बल्कि किराये पर देने के लिए आवासीय संपत्तियों में निवेश करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करेगा.

रियल एस्टेट के लिए विशेष फंड बने

रियल एस्टेट (Real Estate) सेक्टर को सहायता के लिए 25000 करोड़ रुपये का  स्ट्रेस फंड पहले ही सरकार घोषित कर चुकी है. हालांकि मुश्किलों में घिरी और अटकी परियोजनाओं के लिए उद्योग HFC / NBFC के माध्यम से 1,25,000 करोड़ रुपये का फंड तैयार करने की मांग उठाई है. इससे प्रोजेक्ट के लिए लोन प्रस्तावों को तेजी से मूल्यांकन और मंजूरी की लिए रास्ता तैयार होगा.

सबवेंशन स्कीम पर विचार करे सरकार

रियल एस्टेट डेवलपरों ने घर खरीदारों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए सबवेंशन स्कीम (Subvention Scheme) पर से प्रतिबंध हटाने की गुहार लगाई है. सबवेंशन स्कीम में मकान की निर्माण की गति के अनुसार धन देने और आसान किस्तों में ऋण चुकाने की सुविधा है.आरबीआई ने इस स्कीम पर रोक लगा दी थी.

कोरोना का से उबरने के लिए प्रोत्साहन जरूरी

नारेडको (Naredco) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर के देशों को प्रभावित किया है. भारत का रियल एस्टेट सेक्टर भी निराशा की गहराई में जाने नहीं बचा है.  आत्मनिर्भर भारत के तहत घोषित वित्तीय प्रोत्साहन से उपभोक्ताओं की मांग को नए सिरे से बल मिला है, लेकिन अगर मकान खरीदारों को टैक्स छूट, ज्यादा लोन जैसी सुविधाएं दी जाती हैं तो रियल एस्टेट पटरी पर लौट सकता है. संस्था के चेयरमैन राजीव तलवार ने कहा कि बिना किसी सीलिंग के इनकम टैक्स छूट के तहत होम लोन पर ब्याज को पूरी तरह से अनुमति दी जानी चाहिए. हाउस प्रॉपर्टी से नुकसान को पूरी तरह से आय के अन्य प्रमुखों के खिलाफ समायोजित करने की अनुमति दी जानी चाहिए.

डेवलपर्स के लिए टैक्स छूट 2 साल की जाए

 एसोचैम नेशनल कौंसिल ऑन रियल एस्टेट, हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट के अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि अफोर्डेबल हाउसिंग में डेवलपर्स के लिए टैक्स में छूट 2020 के लिए दिया गया था. पूरे वर्ष के लिए महामारी की स्थिति से जूझने के बाद, डेवलपर्स (Real Estate Developers) के लिए यह छूट 2 साल के लिए प्राप्त करने के लिए उत्साहजनक होगी. बैंकों को प्रोजेक्ट आधारित (भूमि और निर्माण) धन 6% पर उपलब्ध कराना चाहिए.पहली बार होमबॉयर्स (अफोर्डेबल हाउसिंग में) स्टैंप ड्यूटी में छूट की आवश्यकता है. दूसरे देशों से अफोर्डेबल हाउसिंग  के निर्माण के लिए टेक्नोलॉजी मदद  (जैसे एल्युमीनियम शटरिंग) कस्टम ड्यूटी से मुक्त होना चाहिए.



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