Some rules for good health | बिमारियों से दूर रहने के कुछ आवश्यक नियम

Some rules for good health | बिमारियों से दूर रहने के कुछ आवश्यक नियम

Some rules for good health | बिमारियों से दूर रहने के कुछ आवश्यक नियम :

आज हमारी जीवनशैली ऐसी हो चुकी है कि हमें अपने काम के आगे अपने व अपने परिवार के लिये बिल्‍कुल भी समय ही नहीं मिल पता, न तो हमें ठीक से सुबह का नाश्ता करने का समय मिल पाता है, और ना ही कसरत करने का। पर अगर हम अपनी जीवनशैली में कुछ छोटी-छोटी बातो को शामिल कर लें और उसे नियमित रूप से करने लगें तो वह हमारे सेहत के लिये बहुत ही फ़ायदेमंद हो सकती है। Some rules for good health | बिमारियों से दूर रहने के कुछ आवश्यक नियम

पानी पीने के सही नियम :

  • सुबह-सुबह उठकर बिना मंजन या कुल्ला किये बासे मुँह दो गिलास गुनगुना पानी अवश्य पीयें |
  • पानी को हमेशा बैठकर और घूँट-घूँट कर ही पीयें |
  • भोजन करते समय अगर प्यार लगे तो एक घूँट से अधिक पानी कदापि ना पीयें, भोजन समाप्त होने के कम से कम डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पियें और जरूर पीयें |
  • हमेशा गुनगुना या सादा ही पीयें | फ्रिज का या ठन्डे पानी का इस्तेमाल कभी भी ना करें | Some rules for good health | बिमारियों से दूर रहने के कुछ आवश्यक नियम

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भोजन करने के आवश्यक और आसान नियम :

  • सूर्योदय होने के पश्चात दो घंटे के भीतर सुबह का भोजन और सूर्यास्त होने के एक घंटे पहले का भोजन जरूर कर लें |
  • यदि दोपहर को भूख लगे तो 12 बजे से 2 बजे के बीच में अल्पाहार लें, उदाहरण के तौर पर – मूंग की खिचड़ी, सलाद, फल और छाछ |
  • सुबह के नाश्ते में दही व फल एवं दोपहर के भोजन में छाछ और सूर्यास्त के बाद दूध का सेवन बहुत फायदेमंद होता है |
  • भोजन को अच्छी तरह चबा-चबाकर ही खाना चाहिए | दिन में 3 से अधिक बार खाना ना खायें । Some rules for good health | बिमारियों से दूर रहने के कुछ आवश्यक नियम

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अन्य आवश्यक नियम :

  1. मिट्टी के बर्तन अथवा हाँडी मे बनाया गया भोजन स्वास्थय के के लिये सबसे अच्छा है |
  2. भोजन पकाने के लिए केवल मूंगफली, तिल, सरसो या नारियल के घानी वाले तेल का ही प्रयोग करें |
  3. चीनी अथवा शक्कर का प्रयोग कभी भी ना करें, इनकी जगह गुड़ या धागे वाली मिश्री (खड़ी शक्कर) का ही इस्तेमाल करें |
  4. भोजन पकाते वक़्त केवल सेंधा नमक या ढेले वाले नमक का ही इस्तेमाल करें | Some rules for good health | बिमारियों से दूर रहने के कुछ आवश्यक नियम
  5. मैदे का प्रयोग शरीर को नुक्सान पहुँचाता है इसलिए इसका इस्तेमाल ना करें |

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Piliya ka ilaj | Jaundice home remedies in hindi | पीलिया का इलाज

Piliya ka ilaj | Jaundice home remedies in hindi | पीलिया का इलाज

पीलिया का इलाज प्राकृतिक तरीके से | Piliya ka ilaj in hindi | Jaundice home remedies in hindi :

जॉन्डिस, जिसे हम पीलिया के नाम से भी जानते हैं। इस बीमारी में इंसान की त्वचा से लेकर आँखों, नाखून व पेशाब का रंग पीला हो जाता है, साथ ही लीवर (यकृत) कमजोर होकर ठीक से काम करना बंद कर देता है व रोगी की भूख धीरे-धीरे घटने लगती है और जी मिचलने की शि‍कायत होती है।Piliya ka ilaj | Jaundice home remedies in hindi | पीलिया का इलाज

सुबह के नाश्ते के साथ :
1. चूना मिलाकर गन्ने का रस पीयें
2. 50 ग्राम मूली के रस में मिश्री मिलाकर पीयें

दोपहर के भोजन के साथ :
1) बथुआ, लौकी, मूली एवं पालक की सब्जियों का प्रयोग |
2) गेंहू एवं जौं से बनी रोटी
3) मूंग की दाल का उपयोग करें |

शाम के भोजन के साथ :
दूध में मुनक्का मिलाकर पीयें |

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आहार पदार्थ जो आप ले सकतें हैं :

निम्नलिखित पदार्थों का सेवन करें :

  • पालक
  • लौकी
  • केला
  • आम
  • मूली
  • पपीता
  • घी
  • आंवला
  • अंजीर
  • मूंग की दाल
  • मुनक्का
  • चोलाई
  • अधिक से अधिक मीठे फलों का सेवन
  • दूध

Note: दिन में अधिक से अधिक आराम करें

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कुपथ्य :
निम्नलिखित वस्तुओं का सेवन ना करें : Piliya ka ilaj | Jaundice home remedies in hindi | पीलिया का इलाज

  • राई
  • सरसो
  • हींग
  • चना
  • तिल
  • उड़द
  • मटर
  • तेज मसाले
  • मैदे से बनी वस्तुएँ
  • तेल से बने पदार्थ

Note: इनके अलावा देर रात्रि तक ना जागें | Piliya ka ilaj | Jaundice home remedies in hindi | पीलिया का इलाज

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How to do surya namaskar in hindi | सूर्य नमस्कार कैसे करें

How to do surya namaskar in hindi | सूर्य नमस्कार कैसे करें

सूर्य नमस्कार करने के 12 आसान आसन | 12 Easy steps of Surya namaskar :

बेहतर स्वास्थ्य के अलावा सूर्य नमस्कार पृथ्वी पर जीवन के संरक्षण के लिए हमें सूर्य के प्रति आभार प्रकट करने का अवसर भी देता है। यदि आप अपने सेहत के प्रति सचेत हैं तो आज से ही अगले 10 दिनों के लिए अपनी सुबह मन में सूर्य की ऊर्जा के प्रति आभार और कृपा का भाव रखकर प्रारंभ करें। How to do surya namaskar in hindi | सूर्य नमस्कार कैसे करें

सूर्य नमस्कार के फ़ायदे हिन्दी में जानने के लिए क्लिक करें

Surya Namaskar – एक पूर्ण यौगिक व्यायाम (A complete Yogic Exercise) :

सूर्य नमस्कार और दूसरे योग आसनों को करने पश्चात योग निद्रा में पूर्ण विश्राम अवश्य करें। ऐसा करने से आप पाएँगे कि यह आपके चुस्त-दुरुस्त, प्रसन्न और शांत रहने का एकमात्र मंत्र बन गया है, एक मंत्र जिस का प्रभाव दिन भर आप के साथ रहेगा How to do surya namaskar in hindi | सूर्य नमस्कार कैसे करें

 

प्रणाम आसन | Prayer pose :

प्रणाम आसन | Prayer pose, How to do surya namaskar in hindi

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हस्तउत्तानासन | Hastauttanasana (Raised Arms pose) :

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हस्तपाद आसन | Hasta Padasana (Hand to Foot pose) :

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अश्व संचालन आसन | Ashwa Sanchalanasana (Equestrian pose) :

अश्व संचालन आसन | Ashwa Sanchalanasana (Equestrian pose)

पर्वत आसन | Parvatasana (Mountain pose) :

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अष्टांग नमस्कार | Ashtanga Namaskara (Salute With Eight Parts Or Points) :

अष्टांग नमस्कार | Ashtanga Namaskara (Salute With Eight Parts Or Points), How to do surya namaskar in hindi

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भुजंग आसन |Bhujangasana (Cobra pose) :

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पर्वत आसन | Parvatasana (Mountain pose) :

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अश्वसंचालन आसन | Ashwa Sanchalanasana (Equestrian pose) :

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हस्तपाद आसन | Hasta Padasana (Hand to Foot pose) :

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हस्तउत्थान आसन | Hastauttanasana (Raised Arms pose) :

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प्रणाम आसन | Prayer pose :

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How to do surya namaskar in hindi | सूर्य नमस्कार कैसे करें

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Surya namaskar benefits | सूर्य नमस्कार के फ़ायदे | सूर्य नमस्कार कैसे करें

Surya namaskar benefits | सूर्य नमस्कार के फ़ायदे | सूर्य नमस्कार कैसे करें

सूर्य नमस्कार के 10 फायदे | जानिए किनके लिए वर्जित है सूर्य नमस्कार :

Surya namaskar 12 प्रकार के विभिन्न योगासनों को मिलाकर बनाया गया है, इसमें हर एक आसान का अपना एक अलग ही महत्त्व है, इसे नित्य करने वाले का हृदय अच्छा होता है, साथ ही शरीर में रक्त का संचार भी समुचित होता है, सूर्य नमस्कार के द्वारा आप अपने मानसिक तनाव को कम कर सकते हैं, इसके द्वारा शरीर को शुद्ध करने में मदद मिलती है, “Surya namaskar benefits, सूर्य नमस्कार के फ़ायदे, सूर्य नमस्कार कैसे करें ” आइए डालते हैं एक नजर सूर्य नमस्कार के विभिन्न 10 लाभों पर:

1. इससे आपका स्वास्थ्य उत्तम होता है :

सूर्य नमस्कार को नित्य क्रिया में शामिल कर सही तरीके से किया जाए तो आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आएगी. 12 आसनों के दौरान गहरी सांस लेनी होती है जिससे शरीर को फायदा होता है.

सूर्य नमस्कार कैसे करें हिन्दी में जानने के लिए क्लिक करें

2. बेहतर पाचन तंत्र के लिए :

सूर्य नमस्कार के दौरान उदर के अंगों की स्ट्रेचिंग होती है जिससे पाचन तंत्र सुधरता है. जिन लोगों को कब्ज, अपच या पेट में जलन की शिकायत होती है, उन्हें हर सुबह खाली पेट सूर्य नमस्कार करना फायदेमंद होगा. “Surya namaskar benefits, सूर्य नमस्कार के फ़ायदे, सूर्य नमस्कार कैसे करें

3. सूर्य नमस्कार करने से पेट का कम होना :

इन आसनों से उदर की मांसपेशियों में मजबूत आती है. अगर इन्हें नित्य किया जाए, तो पेट की चर्बी कम होती है. Surya namaskar benefits

4. डिटॉक्स करने में भी मदद मिलती है :

इन सभी आसनों के दौरान सांस साँस खींचने और छोड़ने से फेंफड़े तक हवा पहुंचती है. इससे खून तक ऑक्सीजन पहुंचता है जिससे शरीर में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड और बाकी जहरीली गैस से छुटकारा मिलता है. “Surya namaskar benefits, सूर्य नमस्कार के फ़ायदे, सूर्य नमस्कार कैसे करें

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5. इसके द्वारा दूर रहेगी हर प्रकार की चिंता :

सूर्य नमस्कार करने से स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है और नर्वस सिस्टम अच्छा व सुदृढ़ होता है जिससे आपकी चिंता दूर होती है. सूर्य नमस्कार से एंडोक्राइन ग्लैंड्स खासकर थॉयरायड ग्लैंड की क्रिया सामान्य होती है.

6. शरीर में काफ़ी लचीलापन आता है :

सूर्य नमस्कार के आसन से पूरे शरीर का वर्कआउट होता है. इससे शरीर फ्लेक्सिबल होता है. “Surya namaskar benefits, सूर्य नमस्कार के फ़ायदे, सूर्य नमस्कार कैसे करें

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7. मासिक-धर्म की क्रिया रेगुलर होती है :

यदि किसी महिला को अनियमित मासिक चक्र की समस्या है, तो सूर्य नमस्कार के आसन करने से परेशानी दूर होगी. इन आसनों को रेगुलर करने से बच्चे के जन्म के दौरान भी दर्द कम होता है.

8. रीढ़ की हड्डी को मिलती है मजबूती :

सूर्य नमस्कार के दौरान तनाव से मांसपेशी व लीगामेंट के साथ रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और कमर लचीला होता है.

9. सूर्य नमस्कार से आप सदैव रहेंगे जवान :

सूर्य नमस्कार करने से चेहरे पर झुर्रियां देर से आती हैं और स्किन में तेज आता है.

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10 वजन कम करने में मदद मिलती है :

सूर्य नमस्कार करने आप जितनी तेजी से वजन कम कर सकते हैं, उतनी जल्दी डायटिंग से भी फायदा नहीं होता. अगर इसे तेजी से किया जाए तो ये आपका बढ़िया कार्डियोवस्कुलर वर्कआउट हो सकता है. “Surya namaskar benefits, सूर्य नमस्कार के फ़ायदे, सूर्य नमस्कार कैसे करें

सूर्य नमस्कार कौन कौन लोग ना करें :

– गर्भवती महिलाएँ तीसरे महीने के गर्भ के बाद से इसे करना बंद कर दें
– हर्निया व उच्च रक्ताचाप के मरीजों को सूर्य नमस्कार न करने की सलाह दी जाती है
– पीठ दर्द की समस्या से ग्रस्त लोग सूर्य नमस्कार शुरू करने से पहले उचित सलाह जरूर लें Surya namaskar benefits
– महिलाएं पीरियड के दौरान सूर्य नमस्कार और अन्य आसन न करें

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History of mangalsutra | मंगलसूत्र का इतिहास | भारतीय परिधान

History of mangalsutra | मंगलसूत्र का इतिहास | भारतीय परिधान

मंगलसूत्र का इतिहास :

Mangalsutra को शादी विवाह का प्रतीक चिन्ह और सुहाग की निशानी माना जाता है। इसलिए विवाह के बाद सुहागन स्त्रियां इसे श्रद्धापूर्वक गले में धारण करती हैं। महिलाएं इसे अपने से अलग तभी करती हैं जब पति की मृत्यु हो जाए या पति पत्नी के बीच संबंध समाप्त हो जाए। History of mangalsutra | मंगलसूत्र का इतिहास | भारतीय परिधान

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मंगलसूत्र पहनने करने का यह नियम परंपरागत तौर पर सालों से चला आ रहा है। इसके पीछे मंगलसूत्र में मौजूद चमत्मकारी गुण का होना माना जाता है।

क्या है मंगलसूत्र का महत्‍व :

मंगलसूत्र के अनेक नाम :

कई राज्‍यों में अनेकों नामों से पुकारा जाता है पर इसका महत्‍व हर जगह एक जैसा ही होता है। मंगलसूत्र पति के प्रति स्नेह व आदर का चिह्न होता है। लोग ये भी मानते है कि इससे पति पर आने वाली परेशानियाँ दूर होती है। History of mangalsutra | मंगलसूत्र का इतिहास | भारतीय परिधान

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मंगलसूत्र का धार्मिक महत्व :

कहा जाता है कि मंगलसूत्र सोने का बना होता है, जिस वजह सोने का हिस्‍सा देवी माता पार्वती को दर्शाता है, और उसमें लगी हुईं काली मोतियां भगवान शिव को दर्शाती हैं। सोना महिला में तेज व ऊर्जा का प्रवाह करता है और मंगलसूत्र के काले मोती उसे बुरी नज़रों से बचाते हैं।

ज्योतिषशास्त्र क्या कहता है :

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सोना गुरू के प्रभाव में होता है। गुरू ग्रह को वैवाहिक जीवन में खुशहाली, संपत्ति एवं ज्ञान का कारक माना जाता है। यह धर्म का कारक भी है। काला रंग शनि का प्रतीक माना जाता है। शनि स्थायित्व एवं निष्ठा का कारक ग्रह होता है। गुरू और शनि के बीच सम संबंध होने के कारण मंगलसूत्र वैवाहिक जीवन में सुख एवं स्थायित्व लाने वाला माना जाता है। History of mangalsutra | मंगलसूत्र का इतिहास | भारतीय परिधान

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मंगलसूत्र से जुड़ी कुछ अन्य बातें :

हर स्त्री को मंगलसूत्र विवाह पर पति द्वारा पहनाया जाता है जिसे वह स्त्री पति की मृत्यु पर ही उतार कर पति को अर्पित करती है। उसके पूर्व किसी भी परिस्थिति में मंगलसूत्र को सउतारना मना है। इसका खोना या टूटना अपशकुन माना गया है।

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History of Turban of Sikh | सिक्ख की पगड़ी का इतिहास | भारतीय परिधान

पगड़ी का इतिहास :

सिखों की पहली और मुख्य पहचान उनकी पगड़ी होती है, जिसे पग भी कहा जाता है, सिर्फ उत्तर भारत में ही नहीं बल्कि पूरे देश और दुनिया के कई हिस्सों में सिखों की अच्छी आबादी इस पगड़ी की वजह से अलग से पहचानी जाती है और समय समय पर इस पगड़ी को लेकर विवाद से भी होती है, सिखों की पगड़ी जैसी आज है, History of Turban of Sikh | सिक्ख की पगड़ी का इतिहास | भारतीय परिधान

History of Turban of Sikh | सिक्ख की पगड़ी का इतिहास | भारतीय परिधान

मौसम से बचाव भी करती थी पगड़ी :

भारत, मध्य पूर्व, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में धूप, बारिश और ठंडी हवाओं से बचने के लिए पग पहनने का चलन शुरू हुआ था. कुछ इलाकों में केवल आस्थावानों को पग पहनने की इजाज़त थी तो कुछ इलाकों में अलग संस्कृति के चलते नास्तिकों को अलग रंग की पग पहनने की व्यवस्था रही, History of Turban of Sikh | सिक्ख की पगड़ी का इतिहास | भारतीय परिधान

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भारत में पगड़ी का प्रचलन कब हुआ :

16वीं सदी में मुग़ल साम्राज्य से पहले भारत में, सामान्य तौर पर केवल शाही परिवारों या उच्च अधिकारियों को ही पगड़ी पहनने की इजाज़त रही थी, ये सामाजिक प्रतिष्ठा और उच्च वर्ग का प्रतीक था, खास तौर से हिंदू संप्रदाय में, निम्न मानी जाने वाली जातियों को पगड़ी पहनने की इजाज़त नहीं थी,

इस्लामी शासन में इस व्यवस्था में बदलाव शुरू हुआ. बाद में, जब औरंगज़ेब का शासन काल आया तब एक खास आबादी को अलग पहचानने के लिए इस पगड़ी का इस्तेमाल शुरू हुआ, History of Turban of Sikh | सिक्ख की पगड़ी का इतिहास | भारतीय परिधान

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अंग्रेज़ी राज से आज़ादी मिलने के बाद भारत में कई धर्मों ने अपनी पहचानों को लेकर विचार शुरू किया, हिंदुओं ने पगड़ी पहनना छोड़ा क्योंकि आज़ादी के समय दंगों में उन्हें सिख समझकर हमले का शिकार होना पड़ रहा था, वहीं, पाकिस्तान में मुस्लिमों ने भी पगड़ी पहनना छोड़ दी,

भारत में जहां पगड़ी एक समय हर वर्ग की सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी रही थी, वहीं आज़ादी के बाद केवल सिखों ने इसे अनिवार्य ढंग से अपनाए रखा, History of Turban of Sikh | सिक्ख की पगड़ी का इतिहास | भारतीय परिधान

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History of Indian Saree | साड़ी पहनने के पीछे का इतिहास | भारतीय परिधान

History of Indian Saree | साड़ी पहनने के पीछे का इतिहास | भारतीय परिधान

साड़ी का इतिहास :

भारतीय संस्कृति में साड़ी एक ऐसा पहनावा है, जो भारत के अधिकांश राज्यों में भिन्न तरीके से ओढ़ा जाता है। साड़ी पहनने के पीछे का इतिहास | History of Indian Saree | भारतीय परिधान

चाहे वह दक्षिण में तमिलनाडु हो या पश्चिम का गुजरात या हो बनारसी साड़ी या फिर बंगाल की धोती; साड़ी को इन सभी राज्यों में उनके पर्व या त्योहारों के दिन पहना जाता है। इसे पारंपरिक वेशभूषा भी कहा जा सकता है ।

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देखा जाए, साड़ी भारतीयता का सूचक है जिसका अपना अलग इतिहास है। तो जानते है कि भारत में साड़ी का इतिहास क्या है ।

साड़ी का इतिहास :

1: साड़ी का उल्लेख वेदों में मिलता है। यजुर्वेद में साड़ी शब्द का सबसे पहले उल्लेख मिलता है। दुसरी तरफ ऋग्वेद की संहिता के अनुसार यज्ञ या हवन के समय स्त्री को साड़ी पहनने का विधान भी है। History of Indian Saree | साड़ी पहनने के पीछे का इतिहास | भारतीय परिधान

2: साड़ी विश्व की सबसे लंबी और पुराने परिधानों में एक है। इसकी लंबाई सभी परिधानों से अधिक है

3: भारतीय साड़ी का उल्लेख पौराणिक ग्रंथ महाभारत में भी मिलता है जहां, साड़ी को आत्मरक्षा का प्रतीक माना गया था। महाभारत के अनुसार जब दुर्योधन ने द्रौपदी को जीतकर उसकी अस्मिता को सार्वजनिक चुनौती दी थी। तब श्रीकृष्ण ने साड़ी की लंबाई बढ़ाकर द्रौपदी की रक्षी की थी।

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4: यदि देखें साड़ी प्राचीन काल से चली आ रही है। जिसमें रीति रिवाज के अनुसार साड़ी पहनी जाती है। विवाहित महिला जहां रंगीन साड़ी पहनती है वहीं विधवा महिलाएं सफेद रंग की साड़ी पहनती हैं। History of Indian Saree | साड़ी पहनने के पीछे का इतिहास | भारतीय परिधान

5: साड़ी की संस्कृती के साथ ही इसको पहनने के भी कई तरीके हैं। या कहें भौगोलिकता के अनुसार साड़ी को भिन्न तरीके से पहना जाता है। उत्तरभारत मे साड़ी का पल्ला पीछे व आगे से लिया जाता है।

6: साडियों के भौगोलिक स्थिति के अलावा, भारत के हर राज्य में साड़ी को अलग नाम से पहचाना जाता है। जिसमें मध्य प्रदेश की चंदेरी, महेश्वरी, मधुबनी छपाई, असम की मूंगा रशम, उड़ीसा की बोमकई, राजस्थान की बंधेज, गुजरात की गठोडा, पटौला, बिहार की तसर, काथा. History of Indian Saree | साड़ी पहनने के पीछे का इतिहास | भारतीय परिधान

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Coconut Baigan Masala | गरी बैगन मसाला | स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन

Coconut Baigan Masala | गरी बैगन मसाला | स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन

Coconut Baigan Masala | गरी बैगन मसाला बनाने की विधि :

Ingredients: Coconut Baigan Masala

 :

  • 1/2 kg brinjal (small size)
  • 3-4 onions (cut in big pieces)
  • 2 tbsp of grated coconut (dried)
  • 1 whole garlic
  • ginger 2 tbsp chilli powder
  • 1 tsp turmeric powder
  • salt to taste
  • small lump of tamarind
  • 1 tbsp garam masala powder
  • 1 tsp jeera

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Process :

Take all the ingredients grind it at once in mixer, do not add water. Add 2 tbsp of oil in pan and heat it, put the mixture in the pan. Fry the mixture properly. Take of the pan from stove and let it cool. Coconut Baigan Masala | गरी बैगन मसाला | स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन

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Take the brinjal slit it in 4, fill the mixture in the brinjal. Pour 2 – 3 tbsp of oil in kadai, heat it and then put the stuffed brinjal, cook it. Add little water to the brinjal. Put small piece of jaggery to taste if required. Let it cook for 15-20 minutes. Coconut brinjal masala is ready. Coconut Baigan Masala | गरी बैगन मसाला | स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन

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Cabbage Kofta Curry | पत्ता गोभी कोफ्ता करी | स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन

Cabbage Kofta Curry | पत्ता गोभी कोफ्ता करी | स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन

Cabbage Kofta Curry | पत्ता गोभी कोफ्ता करी बनाने की विधि :

Ingredients: Cabbage Kofta Curry

 :

  • 1/2 medium size Cabbage Shredded
  • 2 tbsp Besan or all Purpose flour
  • Oil for frying
  • For Gravy
  • 1 medium sized onion
  • a Piece of ginger
  • 1 Cardamon
  • 1 cinnamon stick small
  • 1 clove
  • 1 spoon jeera
  • 1 spoon dhania
  • 2 medium sizes Tomatoes

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Process :

Take the shredded Cabbage in a bowl, add flour & make small round balls with the same. Deep fry the balls in the hot oil & keep aside .In a separate pan heat 1 tsp of oil & add bay leaves & the paste, salt according to taste & little bit of sugar. Cabbage Kofta Curry | पत्ता गोभी कोफ्ता करी | स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन

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Let the paste cook till the oil separates. Can add little water if the paste is too thick. Switch off the flame add the koftas & Cover till Serving. Before serving garnish with fresh coriander leaves. Cabbage Kofta Curry | पत्ता गोभी कोफ्ता करी | स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन

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Palak Paneer recipe | पालक पनीर | स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन

Palak Paneer | पालक पनीर | स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन

Palak Paneer recipe | पालक पनीर बनाने की विधि :

Ingredients: Palak Paneer recipe :

  • Spinach – 500 gms
  • Onions – 5 medium sized
  • Garlic – 2-3 flakes
  • Cooking oil – 6-7 tbsps
  • Cummin seeds – 1 tbsp
  • Paneer – 150-200 gms
  • Salt to taste
  • Garam Masala, Geera Powder, Chilli Powder-1/2 tsp of each

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Process :

Cook the spinach in water. Drain the water and then make puree of the spinach leaves. Cut 4 of the onions finely and saute them till transparent. Grind the other onion and the garlic flakes to a fine paste. Palak Paneer recipe | पालक पनीर | स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन

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Add this paste to the sauted onions. Also add the puree and the spice powders. Add some water if necessary.Let boil for a minute or two. Cut the paneer to cubes of desired size (preferably not too small). Fry this in oil till golden brown, Add this paneer to the prepared palak. Serve hot with rice or rotis. Palak Paneer recipe | पालक पनीर | स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन

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