Astrology : चीन पर आ रहा है शनि का साया, जानें किस ओर है ग्रहों का इशारा

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चीन को लेकर खतरनाक भविष्यवाणी…

इस समय देश दुनिया में तकरीबन हर जगह चीन को लेकर चर्चा बनी हुई है। एक ओर जहां कोरोना महामारी के लिए उसे दोषी माना जा रहा है, वहीं उसकी विस्तारवादी नीति को लेकर भी दुनिया के कई बड़े देश उसके विरुद्ध हो गए हैं। ऐसे में चीन द्वारा भारत ( INDIA ) की सीमाओं के अतिक्रमण की कोशिश ने चीन को दुनिया की नजर में और बड़ा खलनायक बना दिया है।

चीन की इन सभी चालबाजियों के बीच ज्योतिष के कुछ जानकारों ने चीन को लेकर खतरनाक भविष्यवाणी (bhavishyavani) की है। जिसके अनुसार अगले 4 वर्षों में चीन का पतन तय माना जा रहा है।

दरअसल ज्योतिष के जानकार एके शुक्ला, पंडित सुनील शर्मा, वीडी श्रीवास्तव सहित कई अन्य के ज्योतिष के जानकारों के अनुसार चीन की कुंडली ( China kundali ) में शनि की तृतीय चरण की द्वितीय ढेया 24जनवरी 2020 से शुरु हुई, जो 17 जनवरी 2023 तक के लिए विशेष घातक और चीन के विघटन का कारण बनती दिख रही है।

 

वहीं नए संवत्सर 2078 ( Navsamvatsar 2078 ) राक्षस के राजा व मंत्री मंगल होने और चंद्र के वृश्चिक में होते हुए ग्रहण लगने के दौरान चीन की गलत नीतियों के चलते विश्व के प्रमुख देश एक साथ चीन पर हमला कर सकते हैं।

ऐसे में चीन को हार माननी होगी। ऐसे में चीन अंदर से कमजोर होगा, जिसके चलते चीन में तख्तापलट की स्थिति के चलते इसका विघटन होता दिख रहा है।

ज्योतिष के जानकारों के अनुसार चीन कुंडली में शनि की साढे साती के द्वितीय चरण में ही उसके विघटन की नींव 20 जनवरी 2020 को रखी जा चुकी है, ऐसा इसलिए है क्योंकि ज्योतिष ( Astrology ) में माना जाता है कि जब भी शनि किसी की कुंडली के तृतीय चरण आता है, तो ऐसा शनि तृतीय चरण की द्वितीय ढेया के समय जिसकी कुंडली है उसका नाश करता है।

वहीं यदि तृतीय चरण की तीनों ढेया किसी भी तरीके से निकल जातीं हैं तो उस कुंडली ( Kundali ) का जातक लंबी आयु प्राप्त करता है। शनि न्याय का देवता होने के साथ ही अनुशासन प्रिय हैं और हमेशा सत्य का साथ देने वाला ग्रह है।

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चीन की कुंडली ऐसे समझें:
वीडी श्रीवास्तव के अनुसार चीन की कुंडली के अनुसार उसकी राशि मकर है और इस समय शनि मकर में हैं। वहीं चंद्रमा व उच्च के मंगल के भाग्य भाव में होने के कारण चीन हमेशा विस्तारवादी रहता है।

वहीं इसकी कुंडली में बुद्धि के कारक बुध ( Budh ) अष्टम भाव में सूर्य ( surya dev ) व गुरु के साथ है। वहीं बृहस्पति ( Dev Guru Jupiter) की राशि में गुरु के साथ बुध होने के कारण इसे जितना फैलना था यह फैल चुका है।

ऐसे में अब शनि की साढे साती के कारण अब चीन का विघटन तय माना जा रहा है। और उस विघटन के तहत शनि की साढे साती ( Shani ki sade sati ) के तृतीय चरण की द्वितीय ढेया जो 17 जनवरी 2023 तक है और तृतीय चरण की तृतीय ढेया 29 मार्च 2025 तक रहेगी।

इसमें चीन में अस्थिरता, विघटन होगा। इस विघटन के चलते चीन 9 टूकड़ों में बंट सकता है। ये समय अब नजदीक है चीन की राशि मकर है और चीन का तृतीय चरण की द्वितीय और तृतीय ढेया में विभाजन होने का ग्रह लगभग निश्चित संकेेत दे रहे हैं।

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चीन का विघटन योग : ज्योतिष के जानकार एके शुक्ला का कहना है कि शनि (चतुर्थ भाव में सिंह राशि में पीडित),वहीं शनि की सप्तम दृष्टि दशम भाव में होने से चीन में शनि के तृतीय चरण की द्वितीय ढेया में तख्ता पलट और विघटन का योग बनता दिख रहा है।

इसके अलावा ग्रहों के अनुसार विकसीत देश इस समय चीन पर कई प्रतिबंध भी लगाएंगे। वही जल्द ही चीन के मित्र देश भी उससे दूर हो जाएंगे। कुल मिलाकर शनि के तृतीय चरण की द्वितीय ढैया चीन के विघटन को दर्शा रही है।

ये भी हैं खास बातें…
वहीं पंडित सुनील शर्मा के अनुसार चीन पर चंद्रमा व उच्च के मंगल ( Mars ) के प्रभाव उसकी नीतियों पर साफ देखने को मिलते हैं। वहीं आने वाली नई दशाओं में शनि का प्रभाव चीन पर अत्यंत भारी पड़ने वाला है, ऐेसे में सभी ज्योतिष ( Jyotish ) के जानकार जिस मामले में सहमत हैं वे इस प्रकार हैं..

: 17 मार्च 2023 से पहले ग्रह तिब्बत के स्वतंत्र होने का इशारा कर रहे हैं। लेकिन यदि किन्हीं ग्रहों के कारण ये रूक भी गया तो भी मार्च 2025 तक तुला राशि के तिब्बत स्वतंत्र होने की ओर ग्रहों का संकेत साफ दिख रहा है।

: चीन की मेष,तुला और धनु शत्रु राशि हैं। ऐसे में इन तीन राशियों के नाम पर चीन के जो भी प्रांत हैं वे और इन नाम राशियों वाले चीन के मित्र देश भी जल्द ही उसके शत्रु देश होते दिख रहे हैं। और चीन के विघटन में इनका बहुत बड़ा रोल होगा। ऐसे में ग्रहों के अनुसार A,I,R,T,K व P इन नामों वाले देशों के इक्ट्ठे होकर चीन पर हमला करने की संभावना है।

: कुल मिलाकर 29 मार्च 2025 से पहले चीन में विघटन तय माना जा रहा है।





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