स्पुतनिक V की कीमत पर बड़ा खुलासा, भारत में हर साल बनेंगी 85 करोड़ खुराक

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Photo:PTI

स्पुतनिक वी को DCGI की मंजूरी, भारत में हर साल बनेंगी 85 करोड़ खुराक

नयी दिल्ली। रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) ने कहा कि भारत में हर साल स्पुतनिक वी वैक्सीन की 85 करोड़ से अधिक खुराक तैयार होंगी। भारत ने कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए स्पुतनिक वी के सीमित आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी दी है। भारतीय दवा महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने आपातकालीन उपयोग के लिए इस वैक्सीन को पंजीकृत किया है। यह वैक्सीन रूस में क्लीनिकल ट्रायल को पूरा कर चुकी है, तथा भारत में तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में इसके परिमाण सकारात्मक हैं। भारत में यह परीक्षण डॉ.रेड्डीज के साथ मिलकर किए गए। 

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60वां देश बना भारत 

आरडीआईएफ ने एक बयान में कहा कि करीब तीन आबादी वाले देशों में वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी है और भारत स्पुतनिक वी को मंजूरी देन वाला 60वां देश है। बयान में कहा गया कि आबादी के लिहाज से भारत इस टीके को अपनाने वाला सबसे बड़ा देश है और वह स्पुतनिक वी के उत्पादन में भी अग्रणी है। डीसीजीआई ने कुछ शर्तों के साथ स्पुतनिक वी के सीमित आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दी है। 

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Sputnik V की एक खुराक की कीमत क्या है?

अभी तक Sputnik V की भारत में कीमत कितनी होगी यह स्‍पष्‍ट नहीं है। अन्य देशों में जहां इसे मंजूरी दी गई है वहां इसकी कीमत 10 डॉलर प्रति डोज से कम है। अभी फिलहाल इस वैक्सीन को लेकर सरकार की जो मौजूदा व्यवस्था चल रही है उसी आधार पर इसे लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। डॉ रेड्डी लैबोरेटरीज से 10 करोड़ डोज बनाने की डील हुई है। इसके अलावा RDIF ने हेटरो बायोफार्मा, ग्‍लैंड फार्मा, स्‍टेलिस बायोफार्मा, विक्‍ट्री बायोटेक से 85 करोड़ डोज बनाने का भी करार कर रखा है। इस वैक्सीन को मंजूरी मिलने से वैक्सीन लगवाने वालों के लिए एक और वैक्सीन उपलब्ध हो गई है, जिससे कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन अभियान को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलेगी। 

अभी हैं ये दो वैक्सीन

स्पुतनिक वी भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली तीसरी वैक्सीन है। इससे पहले डीसीजीआई ने जनवरी में पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन कोविशील्ड तथा भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी थी। आरडीआईएफ के सीईओ किरिल दिमित्रिव ने कहा कि वैक्सीन को मंजूरी एक बड़ा मील का पत्थर है, क्योंकि दोनों देशों के बीच स्पुतनिक वी के नैदानिक ​​परीक्षणों और इसके स्थानीय उत्पादन को लेकर व्यापक सहयोग विकसित हो रहा है। 





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