Breast Cancer: 0 से चार, कैंसर के होते हैं अलग-अलग चरण, वक्त रहते समझना है जरूरी

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छाती की कोशिका में विकसित होनेवाले कैंसर को ब्रेस्ट कैंसर कहा जाता है. कैंसर की ये किस्म महिला और पुरुष दोनों को प्रभावित कर सकती है. लेकिन पुरुषों में इसके मामले बहुत कम पाए जाते हैं. WHO के मुताबिक ब्रेस्ट कैंसर ज्यादातर महिलाओं में पाई जानेवाली बीमारी है. दुनिया भर की 2.1 मिलियन महिलाओं को हर साल ये प्रभावित करता है. महिलाओं में कैंसर से जुड़ी ज्यादा मौत का कारण भी बनता है. शुरू में कैंसर की पहचान कर समय पर काबू करने से जिंदगी बचने में मदद मिल सकती है.

ब्रेस्ट कैंसर को पांच चरणों में बांटा जाता है. ये इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर कितना फैल गया है. कई कारकों के आधार पर डॉक्टर कैंसर के चरणों को श्रेणीबद्ध कर सकते हैं. कैंसर के कारकों में ट्यूमर का आकार, आक्रामक या गैर आक्रामक, ऊत्तकों या अंगों के पास कैंसर का फैलना शामिल होता है. ब्रेस्ट कैंसर के पांच चरणों को जानना आपके लिए जरूरी होगा.

0 चरण

इस चरण पर कैंसर का पता चल पाना मुश्किल होता है. 0 चरण में स्तनों की नलिका तक अन्य ऊत्तकों को प्रभावित किए बिना सीमित रहता है. इसलिए इस चरण को डक्टल कार्सिनोमा इन सीटू (DCIS) कहा जाता है. इस चरण में कैंसर आक्रामक नहीं रहता है.

प्रथम चरण

ये ट्यूमर का शुरुआती चरण होता है. इसमें ट्यूमर का आकार दो सेंटीमीटर तक फैल जाता है. इस चरण में लिम्फ नोड्स (शरीर में गांठ ) में कैंसर कोशिकाओं के छोटे ग्रुप के विकास की आशंका भी रहती है. लिम्फ नोड्स हमारे शरीर में अंडाकार की ऊत्तकों से बनी ग्रंथियां होती हैं. ये शरीर को कैंसर और संक्रमण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

दूसरा चरण

इस चरण पर ट्यूमर करीब आसपास के लिम्फ नोड्स को प्रभावित करते हुए दो सेंटीमीटर हो जाता है. कुछ मामलों में ट्यूमर का आकार 2-5 सेंटीमीटर बिना लिम्फ नोड्स को प्रभावित किए हो जाता है.

तीसरा चरण

कैंसर अलग-अलग एक्सिलियरी लिम्फ नोड्स तक फैल जाता है. साथ ही ट्यूमर का आकार अलग-अलग हो जाता है. अन्य मामलों में ट्यूमर का आकार पांच सेंटीमीटर से ज्यादा होकर लिम्फ नोड्स को प्रभावित करता है.

चौथा चरण

कैंसर चौथे चरण में पहुंचने के बाद खतरनाक हो जाता है. इस चरण में लिवर, लंग्स या ब्रेन तक को प्रभावित कर सकता है. यहां तक कि हड्डियों तक को भी अपनी चपेट में ले सकता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक हर महिला को शुरुआती स्तर पर ही स्थिति का पता लगाने के लिए मैमोग्राफी कराना चाहिए.

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