क्या दूध का इस्तेमाल बढ़ाता है आपका कोलेस्ट्रेल लेवल? जानिए रिसर्च के हैरतअंगेज नतीजे

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कोलेस्ट्रोल मुख्य रूप से दो तरह का होता है-हाई डेंसिटी लिपॉप्रोटीन और लो डेंसिटी लिपॉप्रोटीन. हाई डेंसिटी वाला कोलेस्ट्रोल HDL यानी गुड कोलेस्ट्रोल कहलाता है क्योंकि ये इकट्ठा हो रहे कोलेस्ट्रोल को शरीर से बाहर ले जाने में मदद करता है. जबकि लो डेंसिटी वाले कोलेस्ट्रोल को LDL यानी ‘खराब’ कोलेस्ट्रोल कहा जाता है. LDL नामक बैड कोलेस्ट्रोल ये कोलेस्ट्रोल को दिल की धमनियों में इकट्ठा करता है. दिल की धमनियों में इकट्ठा होने से ब्लड सर्कुलेशन के लिए धमनियां संकुचित होने लगती हैं. ऐसे में आपके शरीर के बाहर ब्लड पहुंचाने में दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.

हार्मोन्स, विटामिन डी और पाचन में सहायक केमिकल के लिए आपके शरीर को कोलेस्ट्रोल पैदा करने की जरूरत होती है. जब ब्लड में खराब कोलेस्ट्रोल की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, तब ये दिल और दिमाग के धमनी की परतों पर प्लेक की वजह बन जाती है.

अगर समय रहते इलाज नहीं कराया जाए, तो प्लेक के जमने से दिल की बीमारी, स्ट्रोक और हार्ट अटैक हो सकता है. किसी शख्स में हाई कोलेस्ट्रोल लेवल के योगदान में कई फैक्टर की भूमिका होती है, और आपका खानपान उनमें से एक सबसे महत्वपूर्ण है. दूध का इस्तेमाल भी उन फैक्टर में से एक माना जाता है, लेकिन एक नई रिसर्च से ठीक इसके विपरीत पता चला है. 

दूध और ज्यादा कोलेस्ट्रोल के बीच संबंध नहीं
हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीज अक्सर दूध छोड़ देते हैं, ये सोचते हुए कि समस्या का ये बुनियादी कारण है. लेकिन नई रिसर्च में पाया गया है कि दूध का नियमित सेवन कोलेस्ट्रोल लेवल नहीं बढ़ाता है. हाई कोलेस्ट्रोल को कम करने के लिए अपनी डाइट से अस्वस्थ फैट्स का हटाना आवश्यक है, लेकिन ये जरूरी भी नहीं है कि उसे और अधिक कोलेस्ट्रॉल के अनुकूल बनाने के लिए पूरी तरह दूध से छुटकारा हासिल किया जाए. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओबिसिटी में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक कोलेस्ट्रोल का ज्यादा लेवल और दूध के इस्तेमाल के बीच संबंध नहीं पाया गया है.

शोधकर्ताओं ने तीन बड़ी आबादी पर किए गए रिसर्च का मूल्यांकन किया. उन्होंने पाया कि जिन लोगों ने बहुत ज्यादा दूध पीया, उनका खराब और अच्छा कोलेस्ट्रोल दोनों का लेवल कम था. पूर्व के प्रमुख रिसर्च की समीक्षा से खुलासा हुआ था कि जिन लोगों ने रोजाना दूध का इस्तेमाल किया, उनको कोरोनरी धमनी की बीमारी का 14 फीसद कम खतरा था. हालांकि, वर्तमान रिसर्च में मजबूत सबूत नहीं मिला जिससे साबित हो कि अधिक दूध का सेवन और डायबिटीज जैसी बीमारियों की शुरुआत के बीच संबंध है. 

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