History of Turban of Sikh | सिक्ख की पगड़ी का इतिहास | भारतीय परिधान

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पगड़ी का इतिहास :

सिखों की पहली और मुख्य पहचान उनकी पगड़ी होती है, जिसे पग भी कहा जाता है, सिर्फ उत्तर भारत में ही नहीं बल्कि पूरे देश और दुनिया के कई हिस्सों में सिखों की अच्छी आबादी इस पगड़ी की वजह से अलग से पहचानी जाती है और समय समय पर इस पगड़ी को लेकर विवाद से भी होती है, सिखों की पगड़ी जैसी आज है, History of Turban of Sikh | सिक्ख की पगड़ी का इतिहास | भारतीय परिधान

History of Turban of Sikh | सिक्ख की पगड़ी का इतिहास | भारतीय परिधान

मौसम से बचाव भी करती थी पगड़ी :

भारत, मध्य पूर्व, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में धूप, बारिश और ठंडी हवाओं से बचने के लिए पग पहनने का चलन शुरू हुआ था. कुछ इलाकों में केवल आस्थावानों को पग पहनने की इजाज़त थी तो कुछ इलाकों में अलग संस्कृति के चलते नास्तिकों को अलग रंग की पग पहनने की व्यवस्था रही, History of Turban of Sikh | सिक्ख की पगड़ी का इतिहास | भारतीय परिधान

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भारत में पगड़ी का प्रचलन कब हुआ :

16वीं सदी में मुग़ल साम्राज्य से पहले भारत में, सामान्य तौर पर केवल शाही परिवारों या उच्च अधिकारियों को ही पगड़ी पहनने की इजाज़त रही थी, ये सामाजिक प्रतिष्ठा और उच्च वर्ग का प्रतीक था, खास तौर से हिंदू संप्रदाय में, निम्न मानी जाने वाली जातियों को पगड़ी पहनने की इजाज़त नहीं थी,

इस्लामी शासन में इस व्यवस्था में बदलाव शुरू हुआ. बाद में, जब औरंगज़ेब का शासन काल आया तब एक खास आबादी को अलग पहचानने के लिए इस पगड़ी का इस्तेमाल शुरू हुआ, History of Turban of Sikh | सिक्ख की पगड़ी का इतिहास | भारतीय परिधान

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अंग्रेज़ी राज से आज़ादी मिलने के बाद भारत में कई धर्मों ने अपनी पहचानों को लेकर विचार शुरू किया, हिंदुओं ने पगड़ी पहनना छोड़ा क्योंकि आज़ादी के समय दंगों में उन्हें सिख समझकर हमले का शिकार होना पड़ रहा था, वहीं, पाकिस्तान में मुस्लिमों ने भी पगड़ी पहनना छोड़ दी,

भारत में जहां पगड़ी एक समय हर वर्ग की सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी रही थी, वहीं आज़ादी के बाद केवल सिखों ने इसे अनिवार्य ढंग से अपनाए रखा, History of Turban of Sikh | सिक्ख की पगड़ी का इतिहास | भारतीय परिधान

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