Kathak – कथक | Indian Dance and Music

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Kathak - कथक | Indian Dance and Music

Indian Dance and Music | Kathak – कथक :

The Kathak dance of North India was said to have evolved from an ancient story telling tradition .The performer narrates myths and religious poetry using subtle hand gestures and facial expressions. Kathak – कथक | Indian Dance and Music

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कत्थक नृत्य kathak Nritya :

भारतवर्ष में जो शास्त्रीय नृत्य प्रचलित है उनमे कत्थक नृत्य प्रमुख है | यह उत्तर भारत का प्रचलित शास्त्रीय नृत्य है, कत्थक शब्द की उत्पत्ति ‘कथक’ से हुई थी|’कथा करोति कत्थक’ यथार्थ जो कथा करता है वह कत्थक है|

कथक का मुख्या उद्येश अपने अभिनय के माध्यम से लोगों तक अपनी कथा को प्रस्तुत करना है, यह एक प्राचीन परंपरा है एवं मोहनजोदड़ो और हरप्पा की खुदाई में कथक करती हुईं मूर्तियां पाई गयी है, यह नृत्य अपनी पारम्परिक वेशभूषा में की जाती है| तबले या पखावज की संगत दी जाती है|नृत्य में घुंगरूंओं का विशेष प्रयोग होता है|नर्तक ठाट ,तोड़े ,परन,टुकड़े के साथ अभिनय एवं भाव से अपनी कला को प्रस्तुत करता है| Kathak – कथक | Indian Dance and Music

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The major part of the interpretive themes centered around Radha Krishna (symbolic of the urge of the soul for the universal or divine soul). Kathak – कथक | Indian Dance and Music

तत्कार Tatkaar :

कथक नृत्य में पैरों एवं पैरों में बंधे घुंगरूंओं से जो ध्वनि की उत्पत्ति होती है उसे तत्कार कहते है,

ठाट Thaat :

कथक नृत्य के आरम्भ करने के तरीके को ठाट कहते हैं|ठाट शब्द का अर्थ है आकार|कथक में ‘ठाट’ से नर्तक अपनी संपूर्ण नृत्य की रूपरेखा दर्शकों के सामने प्रस्तुत करता हैं

आवर्तन Aavartan :

किसी भी ताल की पूरी मात्राएं या संपूर्ण बोल से एक आवर्तन होती है ।अर्थात किसी भी ताल की पहली मात्रा से अंतिम मात्रा तक पूरा करके जब फिर पहली मात्रा पर आतें हैं तब एक आवर्तन पूरा होता है । Kathak – कथक | Indian Dance and Music

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ठेका Theka :

किसी भी ताल के निश्चित बोल को ठेका कहते हैं ।ठेके का बोल ,ताल की ताली , खाली, विभाग आदि को ध्यान में रखकर पूर्व निर्धारित एवं सर्व विदित होते हैं,

सम Sam :

किसी भी ताल की पहली मात्रा को सम कहते हैं ।अक्सर सम पर उस ताल की पहली ताली भी पड़ती है

ताली -खाली Taali-khaali :

हर एक ताल के विभागों को सूचित करने के लिए ताली या खाली का प्रयोग किया जाता है । Kathak – कथक | Indian Dance and Music

लयकारी Laykaari :

दृत ,मध्य और विलम्बित लय के इलावा भी लय के अनेक सक्षम भेद होते हैं जिन्हे लयकारी कहते हैं

The three phases creation, preservation and destruction are clearly reflected through this media. It is therefore based on natural movements and is not confined to mudras. Its poses more life like than sculpturous and abhinaya subtle and true to life cover a very large canvas. Kathak – कथक | Indian Dance and Musi

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