Kathakali – कथकली | Indian Dance and Music

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Kathakali - कथकली | Indian Dance and Music

Indian Dance and Music | Kathakali – कथकली :

Krishnattam, the story of Krishna and Ramanattam the story of Ram evolved into the Kathakali –  the language of gestures during the 17th century. The dance form operates on a base of 24 gestures, several of these convey different things, different meanings. Kathakali – कथकली | Indian Dance and Music

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कथकली नृत्य केरल के दक्षिण – पश्चिम राज्य का एक प्रसिद्ध नृत्य है। यह भारत का अद्वितीय नृत्य है। कथकली का मतलब “नृत्य नाटिका” से है। जिसका अर्थ यह है कि कहानी को प्रस्तुत करते हुए अभिनय करना। इसमें हिन्दू धर्म के ग्रंथों, पुराणों के आधार पर अभिनय किया जाता है।

इस नृत्य के लिए अलग तरीके के परिधान को धारण किया जाता है। इसके लिए होने वाली रूप सज्जा अत्यंत कठिन होती है। नर्तक को विभिन्न तरह के आभूषणों से तैयार किया जाता है। इसकी वेशभूषा और नृत्य लोगों को अत्यंत आकर्षित करता है। Kathakali – कथकली | Indian Dance and Music

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Music and singing in the Kathakali are choreographed based on the story to create the necessary mood. The Songs are based on classical ‘Ragas’ with strict functional logic. The songs are nothing but the dialogue of the characters having dramatic effects. Hence singing has to be in slow tempo since the songs are to be understood by gestures and expressions of character itself.

The songs had to express a great variety of feelings according to the episodic context along with the gestures of hand, movement of body and eye. Therefore, the lyric has to go with the `raag’ to create the appropriate mood and there lies the beauty in singing for a Kathakali show. Kathakali – कथकली | Indian Dance and Music

नृत्य की वेशभूषा बिलकुल अलग है। जो नृत्य की कलात्मकता को दर्शाता है। परिधान उभरा हुआ होता है। चेहरे की सज्जा के लिए बहुत समय लगता है। कथकली की वेशभूषा को पांच भागों में विभक्त किया गया है – पच्चा (हरा), कत्ति (छुरि), करि (काला), दाढी और मिनुक्कु (मुलायम, मृदुल या शोभायुक्त)। नर्तक का मुकुट अत्यंत आकर्षक होता है।

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