महाशिवरात्रि की पूरी कथा जानें | व्रत की पूरी विधि | क्या करें और क्या न करें

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Mahashivratri महाशिवरात्रि की पूरी कथा जानें व्रत की पूरी विधि क्या करें और क्या न करें

Mahashivratri details fasting and precautions:

महाशिवरात्रि का व्रत फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है। इस शुभ दिन व्रत के साथ भगवान शिव (भोलेनाथ) की विशेष पूजा की जाती है। पूरे दिन व्रत (फास्ट) रखा जाता है। शिव पुराण के अनुसार इस दिन एक शिकारी ने अनजाने में ही शिवलिंग पर बिल्वपत्र और जल चढ़ा दिया था जिससे भगवान प्रसन्न हो गए थे। महाशिवरात्रि की पूरी कथा जानें | व्रत की पूरी विधि | क्या करें और क्या न करें

इसी तरह महाशिवरात्रि पर हर प्रहर की पूजा में शिवलिंग पर जल और बिल्वपत्र चढ़ाए जाते हैं, इसके साथ ही अन्य पूजन सामग्रियों के साथ पूजा भी की जाती है। वहीं दिनभर बहुत ही सावधानी से कठिन व्रत भी रखा जाता है।

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व्रत रखने की विधि:

महाशिवरात्रि की सुबह व्रती यानी व्रत करने वाला जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद माथे पर भस्म का त्रिपुंड तिलक लगाएं और गले में रुद्राक्ष की माला धारण करें। इसके बाद समीप स्थित किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग की पूजा करें। इसके बाद व्रत करने का संकल्प करें, महाशिवरात्रि की पूरी कथा जानें | व्रत की पूरी विधि | क्या करें और क्या न करें

महाशिवरात्रि की व्रत का संकल्प (मंत्र):

हाथ में जल, फूल, अक्षत, सुपारी और रुपया रखें। उसके बाद नीचे लिखा मंत्र बोलें

  • शिवरात्रिव्रतं ह्येतत् करिष्येहं महाफलम्।
  • निर्विघ्नमस्तु मे चात्र त्वत्प्रसादाज्जगत्पते।।

यह कहकर हाथ में फूल, चावल व जल लेकर उसे शिवलिंग पर अर्पित करते हुए नीचे लिखा श्लोक बोलें:

  • देवदेव महादेव नीलकण्ठ नमोस्तु ते।
  • कर्तुमिच्छाम्यहं देव शिवरात्रिव्रतं तव।।
  • तव प्रसादाद्देवेश निर्विघ्नेन भवेदिति।
  • कामाद्या: शत्रवो मां वै पीडां कुर्वन्तु नैव हि।।

व्रत में क्या करें और क्या न करें:

इस तरह महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प लेने के बाद पूरे दिन शिवजी का ध्यान करें। दिनभर मन को शांत रखने की कोशिश करें। यानी गुस्से और चिढ़चिढ़ेपन से बचने की कोशिश करें। कम बोलें और झूठ न बोलें। इसके साथ ही पूरे दिन व्रत के समय मन में काम भावना न आने दें। दिनभर शिवजी की पूजा कर सकते हैं, लेकिन शाम को प्रदोष काल में यानी सूर्यास्त के समय शिवजी की विशेष पूजा करें और रातभर जागरण कर के चारों प्रहर में पूजा करने की कोशिश करें।

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महाशिवरात्रि व्रत की पूरी कथा:

किसी समय वाराणसी के जंगल में एक भील रहता था। उसका नाम गुरुद्रुह था। वह जंगली जानवरों का शिकार कर अपना परिवार पालता था।
एक बार शिवरात्रि पर वह शिकार करने वन में गया। उस दिन उसे दिनभर कोई शिकार नहीं मिला और रात भी हो गई। तभी वो झील के किनारे पेड़ पर ये सोचकर चढ़ गया कि कोई भी जानवर पानी पीने आएगा तो शिकार कर लूंगा। वो पेड़ बिल्ववृक्ष था और उसके नीचे शिवलिंग स्थापित था।

वहां एक हिरनी आई। शिकारी ने उसको मारने के लिए धनुष पर तीर चढ़ाया तो बिल्ववृक्ष के पत्ते और जल शिवलिंग पर गिरे। इस प्रकार रात के पहले प्रहर में अनजाने में ही उसके द्वारा शिवलिंग की पूजा हो गई। हिरनी भी भाग गई।
थोड़ी देर बाद एक और हिरनी झील के पास आ गई। शिकारी ने उसे देखकर फिर से अपने धनुष पर तीर चढ़ाया। इस बार भी रात के दूसरे प्रहर में बिल्ववृक्ष के पत्ते व जल शिवलिंग पर गिरे और शिवलिंग की पूजा हो गई। वो हिरनी भी भाग गई। महाशिवरात्रि की पूरी कथा जानें | व्रत की पूरी विधि | क्या करें और क्या न करें
इसके बाद उसी परिवार का एक हिरण वहां आया इस बार भी वही सब हुआ और तीसरे प्रहर में भी शिवलिंग की पूजा हो गई। वो हिरण भी भाग गया।

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फिर हिरण अपने झुंड के साथ वहां पानी पीने आया सबको एक साथ देखकर शिकारी बड़ा खुश हुआ और उसने फिर से अपने धनुष पर बाण चढ़ाया, जिससे चौथे प्रहर में पुन: शिवलिंग की पूजा हो गई।
इस तरह शिकारी दिनभर भूखा-प्यासा रहकर रात भर जागता रहा और चारों प्रहर अनजाने में ही उससे शिवजी की पूजा हो गई, जिससे शिवरात्रि का व्रत पूरा हो गया। इस व्रत के प्रभाव से उसके पाप भस्म हो गए और पुण्य उदय होते ही उसने हिरनों को मारने का विचार छोड़ दिया।

तभी शिवलिंग से भगवान शंकर प्रकट हुए और उन्होंने शिकारी को वरदान दिया कि त्रेतायुग में भगवान राम तुम्हारे घर आएंगे और तुम्हारे साथ मित्रता करेंगे। तुम्हें मोक्ष भी मिलेगा। इस प्रकार अनजाने में किए गए शिवरात्रि व्रत से भगवान शंकर ने शिकारी को मोक्ष प्रदान कर दिया।

Article Source: Dainik Bhaskar

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