Ways to develop sixth sense: कैसे विकशित करें अपने सिक्स्थ सेन्स को

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How to develop sixth sense: सभी व्यक्तियों के पास 5 ज्ञानेन्द्रियां तो होती ही हैं पर क्या आपको यह पता है की हमारे पास छठी इंद्री भी होती हैं। यदि किसी व्यक्ति की छठी इंद्री विकसित हो जाएं तो उसमें दैवीय शक्तियां आ जाती हैं।

How to develop sixth sense: नई दिल्ली। हम सभी में 5 सेंस यानी(ज्ञानेन्द्रियां) मौजूद हैं। सेंस हमारे जीवन में रोज काम आते हैं ये हमें चीज़ों को सही ढंग से समझने, महसूस करने और हमारे जीवन यापन में सहायता करते हैं। सूंघने, देखने, खाने को टेस्ट करने में और स्पर्श करने में इन सेंसेस को उपयोग में लाया जाता है। पर हमारे पास एक छठी इंद्री भी होती है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को ज्ञान होता है। यदि हम सिक्स्थ सेंस को भी प्राप्त कर लें तो हम चीजों को होने से पहले ही भांप सकते हैं ये सेंस हमारे इन्ट्यूशन को बढाती है। ऐसे तो यह सिक्स्थ सेंस हम सभी के अंदर मौजूद है लेकिन विकसित नहीं होता। हम आपको कुछ ऐसे आसान से उपाय बताएंगे जिनको अपनाकर आप सिक्स्थ सेंस विकसित कर सकते हो।

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1. नेचर यानी प्रकृति से जुड़ें
यदि हम जानवरों को देखें तो उनको किसी भी घटना का एहसास हमसे पहले ही हो जाता है क्योंकि वे अभी भी प्रकृति से जुड़े हुए हैं। जब मनुष्य किसी एक जगह टिक कर नहीं रहता था तथा मौसम के अनुसार इधर-उधर जाता था तब तक उसके सिक्स्थ सेंस बहुत अच्छे से काम करते थे। लेकिन आजकल के टाइम में हम प्रकृति से पूरी तरीके से दूर हो गए हैं। हमारा जीवन बस एक कमरा, मोबाइल और टीवी इन्हीं में अटक कर रह गया है। इसलिए यदि हम पेड़, पौधों, जंगल में थोड़ा सा वक्त बिताते हैं तो ये हमारे सिक्स्थ सेंस को विकसित करने में सहायता करते हैं।

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2. सतुलन बना कर रखें
यहां सतुलन का मतलब केवल शारीरिक रूप से ही नहीं है बल्कि मानसिक सतुलन की भी बात हो रही है। आप अपने अंदर सिक्स्थ सेंस को महसूस कर सकते हैं यदि आप अपने व्यवहार में शांति ले लाएं और अपनी ऊर्जा को महसूस करने लगे।

3. छोटी से छोटी चीजों पर ध्यान दें
यदि आप किसी भी नई जगह पर जा रहे हों या किसी रास्ते से गुजर रहे हों तो उस जगह को महसूस करें। वहां पर बैठे लोग, पेड़-पौधें, दुकानें आदि पर ध्यान दें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ये आपके सिक्स्थ सेंस को बढ़ाता है।

4. डायरी में अपने सपनों के बारे में लिखें
यदि आप अपना ड्रीम पूरा करने चाहते हो तो उसे रोज़ डायरी में लिखना ना भूलें। ऐसा करने से आप आगे बढ़ोगे साथ ही साथ उस कार्य को पूरा करने के लिए प्रेरणा भी मिलती रहेगी। और ये आपके सिक्स्थ सेंस को विक्षित करने में मदद करेगा।



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