Weight Loss: लगातार बढ़ रहे मोटापे से परेशान हैं तो जानें मोटापा कंट्रोल करने के सबसे आसान तरीके

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Weight Loss: मोटापा एक ऐसी बीमारी है जो शरीर को आलस्य से भर देता है. कभी-कभार मोटापा उस स्टेज तक पहुंच जाता है, जहां से इसे कम करना लगभग ना मुमकिन होता है. लाख कोशिशों के बाद भी मोटापा कंट्रोल में नहीं आ पता और शरीर बेडौल हो जाता है. आज के वक़्त में अंदाज़न 10 में से हर 8 महिलाएं इसी बढ़ते मोटापे से परेशान हैं.. लेकिन क्या आप जानते हैं इस बढ़ते मोटापे का कारण? अगर आपका जवाब नहीं है तो, हम आपको न सिर्फ इस लगातार बढ़ रहे मोटापे का कारण बताएंगे बल्कि इसे कम करने के कुछ बहुत ही आसान उपाय भी देंगे.

आपके मोटापे के पीछे PCOS तो नहीं  

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम ये एक ऐसी बीमारी है जिसमें वज़न कम करना काफी मुश्किल होता है. आम लोगों के मुकाबले इस बीमारी से पीड़ित महिलाएं काफी जद्दोजहद के बाद ही अपने मोटापे को कंट्रोल में ला पाती हैं. महिलाओं में पीसीओडी सबसे आम हार्मोनल विकार है जो ख़राब लाइफस्टाइल के कारण होता है. इस स्थिति को पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज (पीसीओडी) के रूप में भी जाना जाता है. पीसीओडी महिलाओं में मोटापे की बढ़ोतरी के अलावा प्रजनन क्षमता और प्रेग्नेंसी को प्रभावित करने का काम भी करता है. ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि पीसीओडी वाली महिलाओं में पुरुष हार्मोन का स्तर अधिक होता है. ऐसी महिलाएं इंसुलिन सेंसिटिव बन जाती हैं, जिससे उनका वज़न तेजी से बढ़ता है. वज़न का यूं लगातार बढ़ना बदले में हृदय रोग, स्लीप एपनिया और डायबिटीज़ के जोखिम को पैदा करता है. ऐसे में ज़रूरी है कि अपने बढ़ते मोटापे को कंट्रोल में करने की हर संभव कोशिश करें और हमारे कुछ सरल और हेल्दी तरीकों को अपनाएं.

नियमित वर्कआउट रूटीन अपनाएं

पीसोओएस वाली महिलाओं के लिए जो सबसे ज़रूरी है वो ये कि स्ट्रेस और होर्मोन कंट्रोल करते हुए मेटाबोलिज्म ठीक करना. जिसके लिए आपको बस एक रेगुलर वर्कआउट रूटीन को फॉलो करने की ज़रुरत है. नियमित रूप से किया गया वर्कआउट मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है. साथ ही, हैवी एक्सरसाइज के ज़रिये ही चर्बी जलाने में मदद मिलती है.  इसके अलावा आप कार्डियो और वेट लिफ्टिंग की भी मदद ले सकते हैं. और तो और, योग आपके स्ट्रेस और होर्मोन को कंट्रोल करने में भी मददगार साबित होगा.

कार्बोहायड्रेट बन सकता है ज़हर

कार्बोहाइड्रेट का सेवन आपके इंसुलिन के स्तर पर सीधा प्रभाव डालता है. इसलिए ज़रूरी है कि अपने खाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा वाला फ़ूड ही खाएं. कार्ब्स की सबसे अधिक मात्रा चावल में पाई जाती है इसीलिए चावलों का भी परहेज करें. ऐसा खाना जो बासी हो यानी कि रात का रखा हुआ हो तो उसे भी खाने से बचें. पीसीओडी वाली महिलाओं को अपने खाने में ताजा सब्जियों और फलों को ज़्यादा सेवन करना चाहिए. साथ ही नट्स, बीज और स्वस्थ खाना खाने का नियम बनाएं. ये नियम पीसीओडी के मामले में आपका वज़न कम करने में मदद कर सकता है. जंक फूड, गहरे तले हुए खाद्य पदार्थों और शर्करा वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बना लें.

फाइबर फ़ूड है मोटापे की काट

फाइबर फ़ूड का सेवन करने से आपको कम भूख लगेगी क्योंकि फाइबर आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है. उच्च फाइबर आपको ओवरईटिंग से बचाने के साथ साथ इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने के लिए लिंक करता है जिसका अर्थ है शरीर में कम चिकनाई. इसके अलावा प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ जैसे मछली और अंडे को खाने से भी फायदा होगा. प्रोटीन ब्लड को स्थिर करने में योगदान देता है और आपके शरीर में मौजूद अधिक कैलोरी को कम करता है. अगर आप शाकाहारी हैं, तो आप पौधे आधारित प्रोटीन स्रोतों जैसे कि फलियां, दालें, कच्चे नट्स और बीजों को खा सकते हैं.

प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से कहें- नो

अगर आप पीसीओएस से पीड़ित हैं तो आपको प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन बहुत कम या बंद कर देना चाहिए. क्योंकि पीसीओएस में आपका शरीर अलग तरह से चीनी को संसाधित करता है. यह महत्वपूर्ण है कि आप प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें क्योंकि प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और चीनी दोनों ही ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ाने का काम करते हैं. जिससे आपके शरीर में इंसुलिन सेंसिटिविटी और मोटापा तेज़ी से बढ़ते हैं.

प्रोबायोटिक्स है मददगार

पीसीओडी वाली महिलाओं को प्रोबायोटिक्स का सेवन करना चाहिए. प्रोबायोटिक्स से ग्रसित महिलाओं के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होता है. प्रोबायोटिक्स में उच्च फ़र्मेंटिड खाद्य पदार्थ होते हैं जो आंतों में स्वस्थ बैक्टीरिया बढ़ाने का काम करते हैं. प्रोबायोटिक्स आपके डाइजेशन को मज़बूत बनाते हैं और वज़न कंट्रोल करने में मदद करते है. इसके लिए आप अपने आहार में गाजर, फूलगोभी और बंदगोभी जैसे फ़र्मेंटिड तरल पदार्थों को शामिल करें.

अच्छी नींद से घटेगा मोटापा

नींद की कमी भूख को बढ़ाने वाले हार्मोन की गतिविधि को बढ़ाती है जिसका असर कुछ इस तरह से होता है कि आप दिन भर में अधिक से अधिक खा सकते हैं. अच्छी नींद आपके शरीर को फिर से जीवंत और दोबारा काम करने के लिए सक्षम बनाती है इसलिए सात से आठ घंटे की नींद जरूर लें. इसके अलावा, ध्यान रखें कि जागने के 30 मिनट के अंदर अंदर सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आएं. ऐसा करने से सेरोटोनिन का स्तर शरीर में बढ़ जाता है जिससे रात में मेलाटोनिन के स्तर को बढ़ावा मिलता जो आपको बेहतर नींद देने में सक्षम है.

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